Thursday, October 29, 2020

From the Eyes of Dr Ajay Kumar Ojha : Nature Dawn Painting on 30 October 2020

                                 From the Eyes of Dr Ajay Kumar Ojha : 

Nature Dawn Painting on 30 October 2020

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सुभाषितानि 



संस्कृत भाषा विश्व की प्राचीनतम भाषा है एवं विश्व की सभी भाषाओं में  वैज्ञानिक भी। भारतीय संस्कृति में संस्कृत भाषा का अत्यन्त महत्त्व है। संस्कृत भाषा को देव भाषा भी कहते हैं। हमारे ऋषि-मनीषियों ने अपनी  व्यक्तिगत साधना, अनुभव तथा ज्ञान के आधार पर अनेकानेक श्लोकों की रचना की हैं जो समस्त मानव के लिए ज्ञानदायी हैं  प्रेरणादायी हैं  प्रोत्साहनदायी हैं कल्याणकारी हैं।


  मानं  हित्वा  प्रियो  भवति , क्रोधं  हित्वा  न  शोचति। 
 कामं हित्वार्थवान् भवति, लोभं हित्वा सुखी भवेत्।।

मनुष्य अपना गर्व त्याग कर सबका प्रिय होता है,  क्रोध त्याग कर शोकाकुल नहीं होता दुःखी नहीं होता है, अपनी अभिलाषाओं का त्याग कर अर्थवान् होता है, लोभ (लालच) का त्याग कर सुखी होता है। 


Image (C) Dr Ajay Kumar Ojha

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