Monday, September 28, 2020

From the Eyes of Dr Ajay Kumar Ojha : Nature Dawn Painting on 29 September 2020

From the Eyes of Dr Ajay Kumar Ojha : 
Nature Dawn Painting on 29  September 2020

(The whole article along with all the images  are subject to IPR))



सुभाषितानि 



संस्कृत भाषा विश्व की प्राचीनतम भाषा है एवं विश्व की सभी भाषाओं में  वैज्ञानिक भी। भारतीय संस्कृति में संस्कृत भाषा का अत्यन्त महत्त्व है। संस्कृत भाषा को देव भाषा भी कहते हैं। हमारे ऋषि-मनीषियों ने अपनी  व्यक्तिगत साधना, अनुभव तथा ज्ञान के आधार पर अनेकानेक श्लोकों की रचना की हैं जो समस्त मानव के लिए ज्ञानदायी हैं  प्रेरणादायी हैं  प्रोत्साहनदायी हैं कल्याणकारी हैं। 



येषां न विद्या न तपो न दानं, ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः। 
 ते मर्त्यलोके   भुविभारभूता      मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति।। 


जिनके  (व्यक्ति के ) पास न विद्या है,  न तप है, न दान है, न ज्ञान है , न शील है, न गुण है, न धर्म है वे इस मर्त्यलोक में अर्थात् इस भूलोक में (पर) भार हैं बोझ हैं एवं मनुष्य के रूप में मृग (पशु ) की तरह चरते रहते हैं घूमते रहते हैं। 






Image (C) Dr Ajay Kumar Ojha

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