Tuesday, May 19, 2020

From the Eyes of Dr Ajay Kumar Ojha : Dawn Nature's Painting on 20 May 2020 during Lockdown

From the Eyes of Dr Ajay Kumar Ojha :

 Dawn Nature's  Painting on 20 May 2020 during Lockdown


(All the images are subject to IPR)




" अब तो अन्दर-बाहर एक हो रहा है -  अन्तराकाश-बाह्याकाश एक, भाव एक, रस एक, अनुभूति एक  ;    द्वयता-द्वंद्व-द्वित्व-दुविधा का लोप, केवल एकत्व की महा अनुभूति, महा संसिद्धि।"


निबंध  : "संध्या सुन्दरी  " से उद्धृत 
पुस्तक : नैवेद्यं 
लेखक  : रवीन्द्र नाथ ओझा (Rabindra Nath Ojha )



Image (C ) Dr Ajay Kumar Ojha

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महतां प्रकृतिः सैव वर्धितानां परैरपि।
न जहाति निजं भावं संख्यासु लाकृतिर्यथा।
। 


"दूसरों के द्वारा प्रशंसा पाने पर भी महापुरुषों का स्वभाव वैसा ही रहता है अर्था बदलता नहीं।  जैसे संख्याओं में नौ संख्या का आकार अपनी मौलिकता का त्याग नहीं करता। 
भावार्थ ये है कि प्रशंसा पाने पर भी महापुरुष अपना सरल/विनम्र स्वभाव नहीं छोड़ते हैं। " 

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