Monday, May 18, 2020

From the Eyes of Dr Ajay Kumar Ojha : Dawn Nature's Painting on 19 May 2020 during Lockdown

From the Eyes of Dr Ajay Kumar Ojha :

 Dawn Nature's  Painting on 19 May 2020 during Lockdown


(All the images are subject to IPR)




"पर्वत विराट  का वातायन है, अनन्त की खिड़की है, सनातन का प्रवेश-द्वार है, असीम का स्मारक है - 'Monument of Eternity'. 

निबंध  : "यदि पहाड़ न होते " से उद्धृत 
पुस्तक : नैवेद्यं 
लेखक  : रवीन्द्र नाथ ओझा (Rabindra Nath Ojha )




Image (C ) Dr Ajay Kumar Ojha

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Subhashitani



पीत्वा रसं तु कटुकं मधुरं समानं
माधुर्यमेव जनयेन्मधुमक्षिकासौ।
सन्तस्तथैव  समसज्जनदुर्जनानां
श्रुत्वा वचः मधुरसूक्तरसं सृजन्ति।
। 

"जिस प्रकार यह मधुमक्खी मीठे अथवा कड़वे रस को एक सामान पीकर मिठास ही उत्पन्न करती है, उसी प्रकार सन्त लोग सज्जन और दुर्जन लोगों की बात एक समान सुनकर सूक्ति रूप रस का सृजन करते हैं। 

भावार्थ यह है कि  सन्त लोग सज्जन व दुर्जन में भेदभाव न कर दोनों की बात सुनकर अच्छी बातें कहते हैं, जिस प्रकार मधुमक्खी मीठा अथवा कड़वा दोनों रस  एक समान पीकर  मधु ही उत्पन्न करती है। "





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