Monday, September 7, 2026

फ्रांस में देश के पहले सनातनी (हिंदू) मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा - विश्व में सनातन को ताली:अपने ही देश में गाली

 फ्रांस में देश के पहले पारंपरिक सनातनी (हिंदू) मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा  - विश्व में सनातन को ताली:अपने ही देश में गाली 









फ्रांस की राजधानी पेरिस में देश के पहले पारंपरिक सनातनी (हिंदू) मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक उत्सव वैदिक मंत्रोच्चार और भव्य शोभा यात्रा के साथ संपन्न हो गया है। 

यह गौरवशाली क्षण 6 सितंबर 2026 (रविवार) को आया, जब पेरिस के उपनगर बुसी-सेंट-जॉर्जेस (Bussy-Saint-Georges) में बने भव्य BAPS स्वामीनारायण हिंदू मंदिर का लोकार्पण किया गया। यह न केवल फ्रांस बल्कि संपूर्ण मुख्य भूमि यूरोप (Mainland Europe) के सबसे बड़े हिंदू मंदिरों में से एक माना जा रहा है। 

मंदिर और प्राण-प्रतिष्ठा से जुड़े मुख्य तथ्य
  • महंत स्वामी महाराज की उपस्थिति: वैदिक मंत्रोच्चार के बीच BAPS अक्षरधाम संस्थान के वर्तमान आध्यात्मिक गुरु महंत स्वामी महाराज ने स्वयं इस पावन मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का नेतृत्व किया।
  • देवी-देवताओं की स्थापना: मंदिर में भगवान स्वामीनारायण के साथ-साथ भगवान शिव-माता पार्वती, कार्तिकेय, भगवान सीताराम, लक्ष्मण जी और हनुमान जी सहित कई हिंदू देवी-देवताओं की सुंदर प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। 
  • 56 साल पुराना संकल्प: पेरिस में एक भव्य पारंपरिक मंदिर बनाने का संकल्प सबसे पहले वर्ष 1970 में गुरु योगीजी महाराज ने लिया था। इसके बाद प्रमुख स्वामी महाराज ने इसे आगे बढ़ाया और वर्ष 2021-22 में इसकी नींव रखी गई, जो अब जाकर साकार हुआ है। 
  • अद्भुत वास्तुकला: लगभग 5,000 वर्गमीटर में फैला यह मंदिर प्राचीन भारतीय शिल्पशास्त्र और फ्रांसीसी आधुनिक तकनीक का बेजोड़ मेल है। इसके निर्माण में ग्वालियर के बलुआ पत्थरों के साथ-साथ इटली, ग्रीस और वियतनाम के संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर में 5 शिखर, 10 विशाल गुंबद और 20 नक्काशीदार स्तंभ इसकी भव्यता बढ़ाते हैं।
  • वैश्विक मंच पर भारत-फ्रांस की सांस्कृतिक दोस्ती
    इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश के माध्यम से समारोह को संबोधित किया। उन्होंने इस मंदिर को भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का एक "नया युगस्तंभ" बताया और कहा कि यह मंच संपूर्ण विश्व के लिए 'वसुधैव कुटुंबकम' (पूरी धरती एक परिवार है) की भावना को जागृत करता है। 
  • प्राण-प्रतिष्ठा से पहले पेरिस की सड़कों पर भारतीय परिधानों में सजे श्रद्धालुओं ने एक विशाल और भव्य नगर यात्रा (शोभा यात्रा) निकाली, जिसमें 40 से अधिक देशों से आए संतों, मेहमानों और प्रवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस ऐतिहासिक उद्घाटन के उपलक्ष्य में 2 सितंबर से 14 सितंबर 2026 तक 13 दिवसीय भव्य 'सांस्कृतिक उत्सव' (Festival of Culture) का आयोजन किया जा रहा है। 


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