Wednesday, September 2, 2026

प्रतिक्रियाएं : अनामिका साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच' की राष्ट्रीय ऑनलाइन मासिक काव्य गोष्ठी (1 सितंबर 2026)

 

प्रतिक्रियाएं :

अनामिका साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच' (Anamika Sahityik Evom Sanskritik Manch)  की  राष्ट्रीय ऑनलाइन मासिक काव्य गोष्ठी (1 सितंबर 2026)






स्वागत वक्तव्य :
(डॉ सुशीला ओझा
संरक्षिका
अनामिका साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच)


अनामिका साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच पर दूसरे सत्र की आज की इस चतुर्दश ऑनलाइन काव्य गोष्ठी में मैं सुशीला ओझा आप सभी का हार्दिक वन्दन, अभिनन्दन करती हूंँ। यह मंच समीक्षक, आलोचक, शिक्षाविद्, रंगकर्मी, संस्कृतिकर्मी, प्रोफेसर डॉ बलराम मिश्र जी को समर्पित है। अपनी समृद्ध पुस्तकालय का नाम उन्होंने अनामिका रखा था। छायावादी रचनाकारों के प्रति उनका आकर्षण सर्वविदित है। उन्हें स्मरण करना मुझे ऊर्जस्वित और प्रोत्साहित करता है। यह सितम्बर माह अनेक हिन्दी साहित्य सेवियों को स्मरण और नमन करता है। जहाँ एक ओर गोविन्द मिश्र, दुष्यन्त कुमार, राही मासूम रज़ा, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, चित्रा मुद्गल, सर्वेश्वरदयाल सक्सेना, शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय, काका हाथरसी, श्रीकान्त वर्मा, कुँवर नारायण, रामधारी सिंह दिनकर जैसे अनेकानेक हिन्दी साहित्य के प्रखर पुंज उद्भट विद्वानों एवं हिन्दी सेवियों की जन्मदिवस और जयंतियाँ हैं, वहीं धर्मवीर भारती, शरद जोशी, रामवृक्ष बेनीपुरी, गजानन माधव मुक्तिबोध, महादेवी वर्मा, रांगेय राघव, चंद्रधर शर्मा गुलेरी, काका हाथरसी, विष्णु खरे, सर्वेश्वरदयाल सक्सेना, वीरेन डंगवाल, शिव प्रसाद सिंह जैसे माँ सरस्वती के अनेक वरद पुत्र-पुत्रियों की पुण्यतिथियाँ भी हैं। भाद्रपद मास की घनघोर घटाएंँ और तड़ित दामिनी हमें भयभीत कर रही हैं। अपने विकराल रूप में आकर प्रलय एवं आपदा से धरा को छिन्न-भिन्न कर रही हैं। धरती अथाह जलराशि से आप्लावित हो गई है। वर्षा ऋतु कृषकों के लिए अमृतदान बनकर आता है। श्रावण मास में कृषक मन उल्लास और आनंद से मयूर की तरह नृत्य करने लगता है किन्तु भाद्रपद मास में वे ही कृषक भयाक्रांत हो रहे हैं। जहाँ सावन सोहावन, हरसावन, मनभावन होता है, वहीं भादो अपने रौद्र रूप में मूसलाधार वर्षा से सर्वत्र जलप्लावन की स्थिति कर देता है। इसकी भयावहता को देखकर सूने घर में विरहिणी के दुख की कोई सीमा नहीं रह जाती है। विद्यापति करुणासिक्त विरहिणी का बड़ा सुन्दर सजीव चित्रण किया है -"सखि हमर दुखक नहिं ओर/ इभर बादर माह भादर सून मंदिर मोर।" इसी माह में पूर्ण ब्रह्म का जन्म होता है। इस मास में उत्सवधर्मिता का नवोन्मेष होता है। कल्याणकारी जगत पिता शिव का तो यह पवित्र मास समर्पित है ही, साथ ही जगत उद्धारक श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी और गणनायक करिवर वदन को भी समर्पित है। चुनौतियों के बीच जीता-जागता मनुष्य विपरीत परिस्थितियों में भी उत्साह और उत्सवधर्मिता का मार्ग ढूँढ ही लेता है। 
        प्राकृतिक सौंदर्य सुषमा से परिपूर्ण भूमि छत्तीसगढ़ से डॉ संगीता मनीष बनाफर जी, उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक भूमि से डॉ शैलजा दूबे जी, विश्व पटल पर हिन्दी को मान दिलाने वाली महाराष्ट्र की भूमि से डॉ ममता जैन जी, बिहार की बौद्धिक भूमि से सशक्त हस्ताक्षर डॉ अनीता देवी जी, नवोदित किन्तु स्थापित रचनाकार लकी कुमारी जी, अहिन्दी भाषी क्षेत्र से स्त्री स्वर की मुखर अभिव्यक्ति देने वाली श्रीदेवी जी, शक्ति की आराधक शक्तिपुंज भूमि से स्त्री सशक्तिकरण की परिभाषा गढ़ रही दर्शना शर्मा जी, पर्यटन एवं संस्कृति के क्षेत्र में अत्यंत सक्रिय विनय जायसवाल जी, महाराणा के शौर्य और पराक्रम की भूमि से मयंक शर्मा जी - आप सभी की सर्जनात्मक उपस्थिति को मैं नमन करती हूँ। 


          महिला सशक्तिकरण की सार्थक परिभाषा गढ़ रही अध्यक्ष सुमन झा और इस मंच के सभापति डॉ अजय कुमार ओझा का मैं हृदय से स्वागत करती हूँ। इस ऑनलाइन काव्य गोष्ठी के सूत्रधार कमल अपरिचित जी और प्रणति ठाकुर की हिन्दी सेवा भावना को नमन करती हूँ। आप सभी अनामिका साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच के महत्त्वपूर्ण स्तम्भ हैं। आपके सुझाव, सहयोग और मार्गदर्शन के बिना इस मंच की कल्पना निराधार है। आप सभी को समक्ष देखकर, सुनकर मैं अत्यंत गौरवान्वित हो रही हूँ। संचालन का संपूर्ण भार यशस्विनी प्रणति ठाकुर को देती हूँ। आप सभी का पुनः वदन, अभिनन्दन करती हूँ। 


कार्यक्रम की अध्यक्ष :
डॉ.संगीता मनीष बनाफर 
बिलासपुर, छत्तीसगढ़ 
(व्याख्याता, साहित्यकार, समाजसेवी, वक्ता )
शिप्रा जी, आज के इस शानदार आयोजन के लिए आपको हार्दिक बधाई! कार्यक्रम सचमुच बेहद उत्कृष्ट रहा, जिसमें सभी अनुभवी और मंजे हुए कवियों ने अपनी उपस्थिति से समा बांध दिया। मंच का संयोजन और संचालन भी अत्यंत उच्च कोटि का था।
​इस भव्य आयोजन में मुझे आमंत्रित करने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार। इस अवसर पर पूजनीय माता-पिता जी का असीम स्नेह और आशीर्वाद भी प्राप्त हो रहा था, जिसने इस पूरे अनुभव को मेरे लिए और अधिक अलौकिक व भावनात्मक बना दिया।
​यद्यपि किसी कारणवश मैं कार्यक्रम के अंत तक नहीं रुक पाई, जिसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूँ, किंतु जितना भी समय वहाँ व्यतीत हुआ वह अत्यंत स्मरणीय रहा। एक बार फिर इस सफल आयोजन के लिए आपको ढेरों बधाइयाँ!


डॉ.  दर्शना शर्मा 
कोलकाता 
(प्रोफेसर, साहित्यकार, समाजसेवी, शोधकर्मी )

शिप्रा दीदी सफल कार्यक्रम की बधाई व शुभकामनाएं।
प्रणति दीदी आप का सुंदर संचालन 👏👏🙏🙏 आपको बधाई व शुभकामनाएं।

डॉ. शिप्रा मिश्रा 
संस्थापिका एवं संयोजक 
अनामिका साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच 

आप सभी की गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम में चार चांद लग गए 👏



डॉ. ममता जैन
पुणे, महाराष्ट्र 
(पुरातत्व शोधकर्मी, सम्पादक, दूरदर्शन प्रस्तोता, लेखिका )

आदरणीय शिप्रा जी आपको बहुत-बहुत बधाई और बहुत-बहुत धन्यवाद इतना सुंदर साहित्यिक मंच से आपने मुझे जोड़ा कार्यक्रम बहुत सफल रहा आप निश्चित रूप से प्रशंसा के पात्र हैं और आपकी पूरी टीम भी🙏🌹💐
सभी की प्रस्तुति समसामयिक थी.. सारे रस आज के कार्यक्रम में बरसे।


विनय जायसवाल 
कोलकाता 
(साहित्य, संस्कृति , पर्यटन एवं योग के क्षेत्र में सक्रिय )

आज का कार्यक्रम वास्तव में अमरत्व को प्राप्त कर गया।
कुछ आयोजन समाप्त होकर समाप्त नहीं होते—वे स्मृतियों में उतर जाते हैं, और स्मृतियाँ जब हृदय में घर कर लें, तो वही क्षण कालातीत हो जाते हैं।

इस अद्भुत एवं आत्मीय आयोजन के लिए संयोजिका शिप्रा दीदी एवं माताजी के प्रति हृदय की गहराइयों से आभार। 🙏

प्रणति दीदी, कार्यक्रम के इतने सुंदर एवं प्रभावशाली संचालन के लिए आपको हार्दिक बधाई एवं बहुत-बहुत धन्यवाद। आपके सहज, सधे हुए और आत्मीय संचालन ने पूरे कार्यक्रम को एक सुंदर लय, गरिमा और प्रवाह प्रदान किया। सचमुच, मंच संचालन भी एक कला है और आपने इसे बेहद खूबसूरती से निभाया। 🌸🙏

आज ऐसा लगा मानो प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर का कोई एक रंग, कोई एक रस, कोई एक अनुभूति लेकर आया था। उन सभी रंगों और रसों के मिलन से जो हृदयस्पर्शी इंद्रधनुष बना, उसकी सुंदरता किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक संवेदना की थी। 🌈

मेरे लिए यह अवसर केवल सहभागी होने का नहीं, बल्कि जानने, समझने और सीखने का भी था। कई बार जीवन हमें पुस्तकों से नहीं, बल्कि मनुष्यों से पढ़ाता है; आज ऐसे ही कुछ जीवंत पाठ सीखने का सौभाग्य मिला।

अंततः, हम अंतर्मन से सभी सुधीजनों के प्रति कृतज्ञता एवं आभार व्यक्त करते हैं।

आप सबकी उपस्थिति, आपकी संवेदनाएँ और आपके विचार इस संध्या को एक साधारण कार्यक्रम से उठाकर एक ऐसी स्मृति में बदल गए, जो समय के साथ धुंधली नहीं होगी।

कुछ क्षण बीतते नहीं—वे भीतर बस जाते हैं।
आज का दिन उन्हीं क्षणों में से एक था। 🙏🌸


श्रीमती प्रणति ठाकुर 
महामंत्री एवं संचालक 
अनामिका साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच 

बहुत बहुत आभार विनय भाई ।आप सबके सारगर्भित काव्य पाठ ने कार्यक्रम को अत्यंत सफल बनाया है। हार्दिक धन्यवाद आप सबका 🙏🙏


मयंक शर्मा 
सीकर, राजस्थान 
(अध्यापक एवं लर्नर )

कल आदरणीया शिप्रा दीदी के कॉल के साथ सार्थक शुरुआत हुई, जब उन्होंने पूछा था कि "समय याद है ना", और उसके बाद वह पूरा समय अत्यंत अविस्मरणीय क्षणों में परिवर्तित होता चला गया।
गोष्ठी में उपस्थित सभी माननीय सदस्यों की उपस्थिति बहुत ही सार्थक रही। सभी वरिष्ठ रचनाकारों के श्रीमुख से जो उत्कृष्ट काव्य-पाठ और प्रेरक विचार सुनने को मिले, वे सीधे हृदय को स्पर्श कर गए। आप सभी गुणीजनों को सुनना और आपकी रचनाधर्मिता से रूबरू होना मेरे लिए एक अत्यंत ज्ञानवर्धक और सुखद अनुभव रहा।
आदरणीया प्रणति जी के कुशल और शानदार संचालन से लेकर हर एक सदस्य का सहयोग अप्रतिम रहा। आपके इस अनुज को आप सबका जो स्नेह और आशीर्वाद मिला है, वह मुझे आजीवन याद रहेगा और निरंतर साहित्य सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।
इस भव्य आयोजन के लिए सभी का हृदय से अनंत आभार!













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