Sunday, August 9, 2026

"Amidst Tharu Tribe of West Champaran for More than Five Decades" - Dr. Ajay Kumar Ojha

"पश्चिम चम्पारण के थारू आदिवासियों के बीच पांच दशक से ज्यादा" - डॉ. अजय कुमार ओझा 

("Amidst Tharu Tribe of West Champaran for More than Five Decades" - Dr. Ajay Kumar Ojha) 















 आज "#WorldTribalDay" है। ईश्वर की कृपा से मैं पिछले पांच दशक से ज्यादा से #बिहार के #पश्चिमचम्पारण के #थारू #आदिवासियों से ‌जुड़ा हुआ हूं।


#जेएनयू से जो मैंने #पीएचडी की है वह उनके बीच में उनकी झोपड़ी में रहकर किया है - #सहभागीअवलोकन (#ParticipantObservation) तकनीक अपनाकर - वह भी अस्सी-नब्बे के दशक में जब यह क्षेत्र खूंखार #डकैतों और भयानक #माओवादियों से आक्रांत था, किडनैपिंग और हत्या आम बात थी - जब वहां सड़क नहीं थी, बिजली नहीं थी, आवागमन का कोई साधन नहीं था, संचार की कोई सुविधा नहीं थी, नदियों पर पुल नहीं था, स्वास्थ्य की कोई सुविधा नहीं थी - दुर्गम क्षेत्र और डरावना इलाका। इन प्रतिकूल व विपरीत परिस्थितियों में - जब मेरे जीवन पर खतरा हर पल मंडरा रहा था, मारने की बार बार धमकी मिल रही थी - दृढ़ संकल्पित होकर मैंने शोध किया और करीब पच्चीस वर्षों के लगातार शोध के उपरांत जो मैंने #शोध किया मुझे जेएनयू से पीएचडी की उपाधि मिली।

मैं आज भी #थरूहट जाता रहता हूं और इसी कठिन परिश्रम का परिणाम है कि थारू आदिवासी भाइयों पर मेरी एक विस्तृत पुस्तक इसी वर्ष प्रकाशित हुई है - पांच दशकों के लगातार संपर्क व‌ शोध के उपरांत।
THE THARUS OF WEST CHAMPARAN
#अनुराधाप्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित यह पुस्तक #अमेज़न पर उपलब्ध है।

इसके अतिरिक्त थारू भाइयों पर मेरी तीन पुस्तक पहले ही आ चुकी है :
1. From Pasturization to Pauperization of the Tharus
अनुराधा प्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित यह पुस्तक अमेज़न पर उपलब्ध है
2. Wonderful Tharu Tribe, Alluring Thauhat and Charming Champaran
#रचनाप्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित यह पुस्तक अमेज़न पर उपलब्ध है।
3. Demystifying the Origin of Tharus
अनुराधा प्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित यह पुस्तक अमेज़न पर उपलब्ध है।

जब #दूरदर्शनकेन्द्ररांची में मै ‌पोस्टेड था तो‌ मुझे #भगवानबिरसामुंडा जी की जन्मस्थली #उलिहात जाकर भगवान बिरसा मुंडा पर पहली बार किसी भी मीडिया द्वारा वृत्त चित्र बनाने का अवसर मिला जो दूरदर्शन केन्द्र रांची से 1992 में प्रसारित हुआ। उस समय तक कोई भी भगवान बिरसा मुंडा जी की जन्मस्थली पर जाकर न कोई रिपोर्टिंग की थी, न कोई कार्यक्रम बनाया था। उस समय दुर्गम #खूंटी में स्थित अतिदुर्गम #उलिहातू में जाकर #वृत्तचित्र निर्माण के लिए रिकाॅर्डिग करना लगभग असंभव था।



#विश्वआदिवासीदिवस पर आदिवासी भाइयों को बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।

















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