दिल्ली के सत्यवती कॉलेज में नागरी लिपि परिषद् के 52 वें स्थापना दिवस
पर
भव्य राष्ट्रीय नागरी लिपि संगोष्ठी
नागरी लिपि के प्रचार प्रसार के लिए अहर्निश सक्रिय नागरी लिपि परिषद का 52वां स्थापना दिवस दिनांक 17 अगस्त को दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कालेज (सांध्य) में भव्यता पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर केंद्रीय हिंदी निदेशालय के निदेशक एवं वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग के प्रभारी अध्यक्ष डॉ. हितेंद्र मिश्र, मुख्य अतिथि के रूप में - भारतीय विदेश सेवा के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी एवं संयुक्त राष्ट्र संघ अमेरिका में भारतीय प्रतिनिधि श्री धर्मवीर सिंह अति विशिष्ट अतिथि - आथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के महासचिव डॉ. शिव शंकर अवस्थी - कर्मचारी राज्य बीमा निगम, भारत सरकार के निदेशक राजभाषा डॉ. श्याम सुंदर कथूरिया - सत्यवती कॉलेज सांध्य के प्राचार्य हरिमोहन शर्मा और पीजीडीएवी महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ मुकेश अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता नागरी लिपि परिषद के अध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति डॉ प्रेमचंद पातंजलि ने की।
इस अवसर पर नागरी लिपि परिषद द्वारा प्रकाशित पुस्तकों की पुस्तक प्रदर्शनी का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया। सत्यवती महाविद्यालय के प्राध्यापकों और छात्र -छात्राओं ने इस प्रदर्शनी को बड़े उत्साह और उत्सुकता से देखा और इसकी भूरि भूरि प्रशंसा की। नागरी लिपि की वैज्ञानिकता पर शोध करने वाली अध्येता डॉ रश्मि चौबे के कुशल संचालन में समारोह का शुभारंभ अतिथियों द्वारा देवी सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। अतिथियों का स्वागत परिषद की ओर से अंगवस्त्र, शाल और नागरी लिपि परिषद् से प्रकाशित साहित्य भेंट कर किया गया। राजभाषा कार्यान्वयन समिति के प्रभारी और संगोष्ठी संयोजक डॉ आशुतोष तिवारी ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।
विषय प्रवर्तन करते हुए नागरी लिपि परिषद् के महामंत्री डॉ. हरिसिंह पाल ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के परम अनुयायी आचार्य विनोबा भावे की सत्प्रेरणा से 10 अप्रैल 1975 को स्थापित नागरी लिपि परिषद् का प्रथम स्थापना दिवस 17 अगस्त 1975 को नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशनल क्लब में मनाया गया। इसका उद्घाटन तत्कालीन उपराष्ट्रपति और सुप्रसिद्ध नागरी लिपि प्रेमी श्री बी.डी. जत्ती ने किया था। तब से नागरी लिपि परिषद् नागरी लिपि संगोष्ठियों, प्रशिक्षण कार्यशालाओं और अखिल भारतीय नागरी लिपि सम्मेलनों के माध्यम से देश और विदेश में नागरी लिपि का प्रचार प्रसार और संरक्षण एवं संवर्धन कर रही है।
मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय हिंदी निदेशालय एवं सिंधी भाषा संवर्धन बोर्ड के निदेशक और वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग के अध्यक्ष डॉ. हितेंद्र मिश्र ने नागरी लिपि और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए नागरी लिपि परिषद की सराहना की। उन्होंने केंद्रीय हिंदी निदेशालय की गतिविधियों की जानकारी भी साझा की। कर्मचारी राज्य बीमा निगम के निदेशक राजभाषा डॉ. श्याम सुंदर कथूरिया ने सूचना प्रौद्योगिकी और नागरी लिपि विषय पर पीपीटी के माध्यम से नागरी लिपि और हिंदी प्रशिक्षण के बारे में विस्तार से अपने विचार प्रस्तुत किए। इस प्रशिक्षण को सभी ने उपयोगी बताया। भारतीय विदेश सेवा के संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के प्रतिनिधि रहे पूर्व उप महावाणिज्यदूत श्री धर्मवीर सिंह ने नागरी लिपि परिषद् की भूमिका को रेखांकित किया। केंद्रीय हिंदी निदेशालय के पूर्व उपनिदेशक डॉ भगवती प्रसाद निदारिया ने नागरी लिपि के विविध पक्षों पर प्रकाश डाला।
इस समारोह में भारतीय प्रसारण सेवा के पूर्व वरिष्ठ दूरदर्शन अधिकारी, लेखक और संपादक और वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ अजय कुमार ओझा की तीन पुस्तकों का लोकार्पण हुआ - एक भोजपुरी में, एक हिंदी में और एक अंग्रेजी में :
संक्षिप्त वाल्मीकीयरामायण कथासार (भोजपुरी)
एक घोटक की कहानी : उसी की जुबानी (हिंदी)
INDIA IN KOREA : Influence of Buddhism in Korea (English)
इसके साथ ही नागरी लिपि परिषद् की त्रैमासिक पत्रिका ‘नागरी संगम’ और हिंदी अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘सौरभ’ का भी लोकार्पण किया गया।
डॉ शिवशंकर अवस्थी, डॉ मुकेश अग्रवाल, डॉ अजय कुमार ओझा - दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थी श्री राजेन्द्र पाल और श्री शिव नारायण ने भी समारोह में अपने विचार व्यक्त किए। नागरी लिपि परिषद के अध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति डॉ प्रेमचंद पातंजलि ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में सभी के प्रति पर आभार प्रकट किया। राष्ट्रगीत वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के साथ संपन्न इस समारोह में धन्यवाद ज्ञापन नागरी लिपि परिषद के कोषाध्यक्ष आचार्य ओमप्रकाश ने प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर आभासी माध्यम से ऑस्ट्रेलिया से डॉ. सुनीता शर्मा, मारीशस से डॉ. सोमदत्त काशीनाथ, नीदरलैंड से डॉ. रामा तक्षक, चेन्नई से आर श्रीदेवी, गाजियाबाद से श्री ललित भूषण, राजस्थान से डॉ. सुमन सिरोहीवाल सहित अनेक नागरी लिपि प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। समारोह के सफल संयोजन में सत्यवती कॉलेज (सांध्य) के हिंदी प्राध्यापक डॉ. नरेश कुमार और नागरी लिपि परिषद के कार्यालय सहायक श्री कृष्णा कर्तव्य का विशेष सहयोग रहा।
इस अवसर पर अलग से एक अंतरराष्ट्रीय नागरी लिपि सर्वभाषी आभासी कवि सम्मेलन का आयोजन दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थी श्री राजेंद्र पाल के संचालन में किया गया। इसमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, स्पेन, मारीशस और भारत के अनेक राज्यों के साहित्यकारों ने उत्साह पूर्वक काव्य पाठ प्रस्तुत किया।
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