'India in Korea' पुस्तक JNU के मित्र अनिल चौधरी को भेंट
बहुत दिनों से सोच रहा था कि अनिल चौधरी से मिलने जाना है। अस्वस्थ भी हो गया था वो। और 18 अक्टूबर 2026 को वो सुअवसर प्राप्त हुआ। मालूम हुआ कि वो घर पर है और मैं पहुंच गया उससे मिलने।
अनिल चौधरी मेरे साथ जेएनयू (JNU) में था। हम लोग JNU के School of Social Sciences के Centre for the Study of Social Systems यानी Sociology के छात्र थे। हमलोग अस्सी के दशक में जेएनयू के छात्र थे। अनिल हमसे एक साल जूनियर था। और संयोग से हमलोग एक ही छात्रावास सतलज में थे। उसके साथ जो उस समय मित्रता हुई, घनिष्ठता हुई वो आज भी यथावत है। वस्तुत: अनिल मेरे छोटे भाई की तरह है और हमारा संबंध लगता है जनम-जनम का है।
अनिल UPSC से चयनित Indian Trade Service का एक उच्च अधिकारी रहा है - सेवानिवृत्ति से पूर्व वो गुजरात का Development Commissioner रहा है यानी अगर केंद्र में होता तो Additional Secretary रैंक का अधिकारी। पर पूरी इमानदारी और निष्ठा से उसने देश की सेवा की - बड़े-बड़े राजनीतिक दबाव के बाद भी। और स्वभाव वही सहज, सरल निश्छल - अहंकार रहित।
चलते चलते मैंने उसको अपनी एक पुस्तक भी भेंट की -
India in Korea . बहुत प्रसन्न हुआ मेरी पुस्तक पाकर ।
Book : India in Korea
(Influence of Buddhism in Korea)
Author: Dr. Ajay Kumar Ojha
Publisher: Anuradha Prakashan, Delhi
Available on Amazon
संयोग से इस पुस्तक का पहला लोकार्पण SouthKorea में हुआ था - सौजन्य डॉ. अखिलेश अरूण। और संयोग से डाॅ अखिलेश अरूण भी JNU के छात्र रहे हैं।




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