"चुप्पी प्रेम की भाषा है" काव्य संग्रह को मिलेगा
"अनामिका साहित्य सम्मान 2025"
'डॉ बलराम मिश्र स्मृति संस्थान' ने मासिक पत्रिका 'कविकुंभ' की संपादक, 'बीइंग वुमन' सामाजिक संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष, कवयित्री रंजीता सिंह 'फ़लक' को 'अनामिका साहित्य सम्मान- 2025' से समादृत करने का निर्णय लिया है। यह सम्मान उन्हें उनके नए काव्य संग्रह 'चुप्पी प्रेम की भाषा है' के साथ ही उनके साहित्यिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकारों के लिए दिया जा रहा है।
'अनामिका साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच' की संरक्षिका डॉ सुशीला ओझा, संस्थापिका डॉ शिप्रा मिश्रा, सचिव शुभ्रा मिश्रा ने एक संयुक्त बयान में अपनी संस्था की तरफ से इस वर्ष के सम्मान के लिए काव्य-संग्रह 'चुप्पी प्रेम की भाषा है' के चयन की घोषणा की है। 'अनामिका साहित्य सम्मान' विगत तीन वर्षों से चम्पारण, बिहार मूल के वरिष्ठ साहित्यकारों को उनकी साहित्यिक-सामाजिक-सांस्कृतिक अवदान के लिए दिया जाता रहा है।
इस वर्ष 2025 से एक नए शुभारंभ के साथ इसको विस्तार देते हुए बिहार के किसी साहित्यकार की श्रेष्ठ कृति को सम्मानित किया जाएगा।
मार्च 2024 से फरवरी 2025 के मध्य प्रकाशित वर्ष की विशिष्ट कृति के रूप में इस वर्ष काव्य-संग्रह 'चुप्पी प्रेम की भाषा है' का चयन किया गया है। वाणी प्रकाशन से प्रकाशित यह संग्रह इस मायने में विशिष्ट है कि यहांँ प्रेम उस एकमात्र सूत्र के रूप में उद्धृत और व्याख्यायित हुआ है जो इस समय की वैश्विक, सामाजिक चिंताओं, विडंबनाओं और असहमतियों के दौर में भी हमें मनुष्यता के प्रति संवेदनशील और उदार बनाता है। कवयित्री फ़लक प्रेम को जीवन और प्रकृति का मूल तत्त्व मानती हैं और कवि की यही दृष्टि इस संग्रह को उत्कृष्ट बनाती है।
इस सम्मान के तहत संरक्षक मंडल समिति की तरफ से 25000 रुपए की सम्मान राशि, प्रशस्ति पत्र, हस्तशिल्प के उपहार एवं बिहार के टसर सिल्क पर मधुबनी पेंटिंग के अंगवस्त्र प्रदान किए जाएंगे।
संस्थान द्वारा शीघ्र ही इस सम्मान समारोह की पूरी सूचना प्रेषित की जाएगी। इस सम्मान के लिए कवयित्री, संपादक और समाजसेवी रंजीता सिंह 'फ़लक' को 'अनामिका साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच' की ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
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