Sunday, March 28, 2021

From the Eyes of Dr Ajay Kumar Ojha : Nature Dawn Painting on 29 March 2021

                                        From the Eyes of Dr Ajay Kumar Ojha : 

            Nature Dawn Painting on 29 March 2021
            
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सुभाषितानि 



संस्कृत भाषा विश्व की प्राचीनतम भाषा है एवं विश्व की सभी भाषाओं में  वैज्ञानिक भी। भारतीय संस्कृति में संस्कृत भाषा का अत्यन्त महत्त्व है। संस्कृत भाषा को देव भाषा भी कहते हैं। हमारे ऋषि-मनीषियों ने अपनी  व्यक्तिगत साधना, अनुभव तथा ज्ञान के आधार पर अनेकानेक श्लोकों की रचना की हैं जो समस्त मानव के लिए ज्ञानदायी हैं  प्रेरणादायी हैं  प्रोत्साहनदायी हैं कल्याणकारी है।

प्रारभ्यते   न   खलु   विघ्नभयेन  नीचैः
प्रारभ्य विघ्नविहिता विरमन्ति मध्याः।
विघ्नैः   पुनः  पुनरपि    प्रतिहन्यमानाः 
प्रारब्धमुत्तमजना     न   परित्यजन्ति। 

नीच प्रकार के मनुष्य तो आनेवाली विघ्नबाधाओं के डर से किसी कार्य को आरम्भ नहीं करते, मध्यम प्रकार के मनुष्य  कार्य का आरम्भ तो करते हैं परन्तु छोटी छोटी बाधाओं के आते ही काम को अधूरा छोड़ देते हैं पर उत्तमजन ऐसे धैर्यवान होते हैं जो विपत्तियों के बार बार घेर लेने के पर भी अपने हाथ में लिए हुए कार्य को सम्पूर्ण  किए बिना  नहीं रहते। 


"रंगभरी, उमंगभरी, तरंगभरी होली की अशेष शुभकामनाएँ।" 


Image (C) Dr Ajay Kumar Ojha 


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