आचार्य रवीन्द्रनाथ ओझा की पुण्यतिथि
पर
बांके बिहारी की श्रद्धांजलि
दुबली - पतली काया, चौड़ा माथा, तेजस्वी आंखे और आंखों पर ऐनक, सदा सफेद लिबास, ये हैं आचार्य रवीन्द्र नाथ ओझा। आचार्य ओझा अंग्रेजी भाषा और साहित्य के मूर्धन्य मनीषी रहे है । आचार्य ओझा ने तीन चार पीढियों के छात्रों को पढ़ाया और सुशिक्षित किया है। जब आचार्य ओझा इंग्लिश लैंग्वेज का क्लास लेते थे सभी काव्य कर्मी और रचयिता जैसे लोगफेलो, शैली, टेनिसन, पोप, सिसिल फ्रांसिस अलेक्जेंडर, वर्डस्वर्थ मूर्त रूप धारण कर लेते थे उनके पात्र जीवंत हो उठते थे। अपनी प्रतिभा और कृत कर्म से आचार्य ओझा अमर हो गए हैं और आज भी कंटक पथ पर जीवन की समिधा का रसद जुटाने में हमारा मार्ग दर्शन करते हुए प्रतीत होते है।उनकी पुण्य तिथि पर हम उनके बताए हुए रस्ते पर चलें, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
आचार्य ओझा अमर रहें।
बांके बिहारी
(शिष्य आचार्य रवीन्द्रनाथ ओझा)
एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड
सुप्रीम कोर्ट
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